वरिष्ठ अधिवक्ता ने BNSS की धारा 379 के तहत जांच की मांग की, 23 मई को होगी अगली सुनवाई
(रिपोर्ट विवेक राय)
वाराणसी। शहर के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक संस्थान ‘द बनारस क्लब लिमिटेड’ एक बार फिर कानूनी विवादों में घिरता नजर आ रहा है। क्लब के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करने और कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर कलेक्ट्रेट राजस्व बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रार्थी जितेंद्र कुमार तिवारी ने विशेष न्यायाधीश (SC/ST Act) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर विधिक जांच की मांग की है।
प्रार्थी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 379 के तहत मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है। इस पूरे प्रकरण की जानकारी बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी ने मीडिया को दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कैंट थाना क्षेत्र स्थित द बनारस क्लब लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1848 में हुई थी। क्लब को कंपनी एक्ट 1882 के अंतर्गत एक ‘नो प्रॉफिट संस्था’ के रूप में पंजीकृत कराया गया था। आरोप है कि वर्ष 1925 में क्लब को सीमित अवधि के लिए मात्र 10 वर्षों की लीज दी गई थी, लेकिन बाद में क्लब ने ग्राम पहड़पुर एवं पुलिस कार्यालय के समीप स्थित बहुमूल्य सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया।
प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि नगर मजिस्ट्रेट की जांच के बाद आराजी संख्या 211 एवं 850 की जमीन पर कब्जे को लेकर कोर्ट ने 27 जनवरी 2011 को बेदखली का आदेश भी पारित किया था। हालांकि, क्लब की ओर से उक्त आदेश को जिला जज न्यायालय में चुनौती दी गई, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
प्रार्थी ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि क्लब के प्रभावशाली पदाधिकारी अपने प्रशासनिक रसूख का इस्तेमाल कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत के अनुसार:
रजिस्ट्री कार्यालय के अभिलेखों एवं इंडेक्स में कथित रूप से हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
कोर्ट में मूल दस्तावेज प्रस्तुत न कर केवल छायाप्रति (फोटोकॉपी) दाखिल की गई।
क्लब को कागजों में ‘नो प्रॉफिट संस्था’ दिखाया गया, जबकि ROC में लाखों रुपये सदस्यता शुल्क के रूप में दर्शाए गए।
प्रार्थी का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
मामले में 5 फरवरी 2026 को सरकारी अधिवक्ता द्वारा भी न्यायालय में आपत्ति दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया कि क्लब की ओर से न्यायालय पर अनावश्यक दबाव और भय का वातावरण बनाने के उद्देश्य से भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
इस प्रकरण में बनारस क्लब लिमिटेड के साथ उसके कई वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। इनमें वर्तमान सचिव अतुल सेठ, दीपेश वशिष्ठ, राकेश बजाज, गौरव दास, दीपक मधोक, अनिल ओहरी, तन्मय देवा, रोहित कपूर, धवल प्रकाश अग्रवाल, अमित कुमार अग्रवाल समेत पूर्व सचिव नवीन कुमार कपूर, डॉ. प्रफुल्ल सोमानी, जयदीप सिंह, नरेन्द्र प्रताप सिंह, उदय राजगढ़िया तथा पूर्व कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं पूर्व जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह के नाम भी शामिल हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी ने अदालत से मांग की है कि न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए पूरे मामले में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और कूटकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। अब इस बहुचर्चित मामले में 23 मई को होने वाली सुनवाई पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं।




