बाढ़, नाव हादसा, भूकंप और रासायनिक आपदाओं से निपटने के लिए मॉक अभ्यास आयोजित
(रिपोर्ट: विवेक राय)
वाराणसी। देश में किसी भी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से 11वीं बटालियन एनडीआरएफ द्वारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में व्यापक मोबिलाइजेशन ड्रिल एवं मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। यह अभ्यास उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
20 मई को आयोजित इस विशेष अभ्यास में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजीपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, लखनऊ, गोरखपुर और प्रतापगढ़ सहित मध्य प्रदेश के भोपाल एवं विदिशा में एनडीआरएफ टीमों ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त राहत एवं बचाव अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य बाढ़ राहत कार्यों में एनडीआरएफ टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तत्परता का आकलन करना था। अभ्यास के दौरान कई काल्पनिक आपदा परिदृश्यों को तैयार कर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए।
इनमें नदी में नाव डूबना, यात्री नावों की टक्कर, भवन ध्वस्त होना, भूकंप, रासायनिक एवं जैविक आपदाएं तथा सीबीआरएन (Chemical, Biological, Radiological and Nuclear) आपात स्थितियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
आपात सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की विशेषीकृत टीमों को तत्काल सक्रिय किया गया। घटनास्थलों पर पहुंचकर टीमों ने ऑपरेशन बेस स्थापित किया और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। फ्लड वाटर रेस्क्यू, कॉलैप्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू तथा सीबीआरएन प्रतिक्रिया टीमों ने आधुनिक तकनीकों एवं अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मौके पर मौजूद चिकित्सा टीमों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा।
पूरे मॉक अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, नागरिक पुलिस, जल पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्य किया। इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया।
अभ्यास समाप्त होने के बाद सभी विभागों ने संयुक्त समीक्षा बैठक कर भविष्य में आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की।
उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि इस विशेष मोबिलाइजेशन ड्रिल में एनडीआरएफ की कुल 12 टीमें तैनात की गई थीं। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ अत्याधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित है और किसी भी प्रकार की आपदा से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम है।




