गीता चेतना यात्रा के छठवें विश्राम में उमड़ा जनसैलाब, गीता ज्ञान और नैतिक शिक्षा पर दिया गया विशेष बल
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS चौबेपुर (वाराणसी)। कर्मयोगी पीठ द्वारा संचालित 21 दिवसीय गीता चेतना यात्रा का छठवां विश्राम सोमवार को शिव मंदिर, तोफापुर (वाराणसी) में श्रद्धा, उत्साह और जनसहभागिता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्मयोगी पीठ के प्रमुख संयोजक कर्मयोगी गौरव मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों का संरक्षण समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा और सशक्त नेतृत्व प्रदान करना है तो उसे गीता के ज्ञान से जोड़ना होगा।
उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में गीता आधारित नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “यदि युवाओं को अर्जुन बनाना है तो गीता को कक्षा तक लाना होगा।” उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने वाला अमूल्य ज्ञान है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां वितरित की गईं तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण भी किया गया। श्रद्धालुओं ने गीता के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया।
कर्मयोगी पीठ के सदस्य मनोज पांडेय एवं सुरेंद्र चौहान ने अतिथियों, ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि गीता चेतना यात्रा का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव और घर-घर गीता के ज्ञान का प्रकाश पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा समाज में नैतिक जागरण, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत बनाने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के अंत में कर्मयोगी पीठ के पूर्वी क्षेत्र संयोजक श्यामकार्तिक मिश्र ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि गीता चेतना यात्रा का अगला पड़ाव ढाब क्षेत्र के रमचंदीपुर में होगा। यह यात्रा काशी के उत्तर भाग के लगभग 150 गांवों तक पहुंचकर आत्मजागरण, समाज जागरण और राष्ट्र जागरण का संदेश प्रसारित कर रही है।
गीता चेतना यात्रा के माध्यम से युवा पीढ़ी को संस्कार, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने का यह अभियान क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।




