वियतनाम में भारत ने जीते 10 पदक, चौबेपुर के संतोष यादव की कोचिंग में महिला पहलवानों ने रचा इतिहास
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS चौबेपुर (वाराणसी)। वियतनाम के दा नंग शहर में 26 से 31 मई 2026 तक आयोजित अंडर-17 एशियाई महिला कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। भारतीय पहलवानों ने प्रतियोगिता में दो स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदक जीतकर एशिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया तथा ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे चौबेपुर क्षेत्र के अजाव गांव निवासी एवं भारतीय महिला कुश्ती टीम के मुख्य कोच संतोष यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भारतीय कुश्ती संघ द्वारा उन्हें प्रतियोगिता के लिए भारतीय महिला टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। उनके मार्गदर्शन में भारतीय महिला पहलवानों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश को गौरवान्वित किया।
संतोष यादव स्वर्गीय सोमन उस्ताद के शिष्य रहे हैं तथा बलदेव नगर अखाड़ा से जुड़े रहे हैं। प्रतियोगिता में भारत की ओर से तीन कोच और दस महिला पहलवानों का दल शामिल हुआ था, जिसने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए।
संतोष यादव, नंदलाल यादव एवं कौशल्या देवी के पुत्र हैं। वर्तमान में वह भारतीय सेना के बीईजी सेंटर, पुणे में मुख्य कुश्ती कोच के पद पर कार्यरत हैं। उनकी इस उपलब्धि से चौबेपुर क्षेत्र, बलदेव नगर अखाड़ा और खेल प्रेमियों में हर्ष का माहौल है।
बलदेव नगर अखाड़े के वर्तमान उस्ताद संतराम यादव ने कहा कि संतोष यादव अखाड़े के सबसे प्रतिभाशाली और प्रिय शिष्यों में रहे हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्षेत्र और अखाड़े का नाम रोशन किया है।
भारतीय महिला पहलवानों के एशियाई प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन पर भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह बबलू, उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के महासचिव सुरेश चंद्र उपाध्याय, उस्ताद संतराम यादव, सेचन पहलवान, बच्चन पहलवान, छेदी, सवारू, मंशा उपाध्याय, रामचंद्र, रमेश, मस्तराम, लालजी, दीपक, राजकुमार, नागे, आशीष, आकाश सहित अखाड़े के सभी पहलवानों एवं क्षेत्रवासियों ने संतोष यादव और भारतीय महिला टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
संतोष यादव की इस उपलब्धि ने क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों में नया उत्साह भर दिया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर गांव का युवा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकता है।




