जुमे की नमाज़ के बाद निकला अकीदतमंदों का जुलूस, बच्चों ने लाठी-पटा के करतब दिखाए; पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS, चौबेपुर (वाराणसी)। चौबेपुर क्षेत्र के ग्राम सभा कौवापुर में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व पूरे श्रद्धा, अकीदत और अनुशासन के साथ मनाया गया। जुमे की नमाज़ के बाद विभिन्न ताज़ियाओं का भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान “या हुसैन”, “या अली”, “नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “नारा-ए-रिसालत, या रसूलल्लाह” की गूंज से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बाद में सभी ताज़ियाओं को बहरामपुर स्थित कर्बला (कब्रिस्तान) में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
जुलूस में छोटी-बड़ी सभी ताज़ियाएँ आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं बच्चों ने पारंपरिक लाठी-पटा और अन्य युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने जुलूस में शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धापूर्वक याद किया।
मुहर्रम के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय, ईमानदारी और इस्लाम की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी कुर्बानी मानवता, इंसाफ और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। इसी अमर बलिदान की याद में हर वर्ष मुहर्रम ग़म और अकीदत के साथ मनाया जाता है।
जुलूस को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए चौबेपुर प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र सोनकर, जावेद अख्तर, अभय पाण्डेय तथा पुलिस बल पूरे समय मुस्तैदी से तैनात रहा। पुलिस की निगरानी में ताज़िया जुलूस शांतिपूर्वक अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा।
इस अवसर पर मौलाना फैजुर्रहमान, शमशेर खान, इमरान अंसारी, मुगीश अंसारी, जियाउर्रहमान, ग्राम प्रधान नीरज पाल, शाहिद आलम, इकबाल शेख, पूर्व ग्राम प्रधान मकबूल आलम, नागसेन गौतम, विशाल सोनकर, जुम्मन भाई, अहमद अंसारी, शमीम अंसारी, सलाउद्दीन, इरफान मंसूरी, मुख्तार अंसारी, असलम (बीडीसी), शकील अहमद, जावेद मंसूरी, निजामुद्दीन मंसूरी, उबैदुर्रहमान, फरीद मौलवी साहब, अमानतुल्ला अंसारी, डॉ. जाहिद, चाँद बाबू, कैहान आलम, फैजी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।
जुलूस में साकिर भाई की बुर्राक ताज़िया, सनी की ताज़िया, बदरुर्रहमान की ताज़िया तथा रिजवान की ताज़िया सहित कई पारंपरिक ताज़ियाएँ भी शामिल रहीं, जिन्होंने मुहर्रम की धार्मिक परंपरा को गरिमापूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया।




