श्री सतचंडी महायज्ञ के छठवें दिवस में संत ने ओंकार साधना और ध्यान की महत्ता बताई, बाल्यावस्था से संस्कारयुक्त शिक्षा पर दिया बल
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS, चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के धौरहरा-हरिहरपुर में आयोजित श्री सतचंडी महायज्ञ के छठवें दिवस श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री-श्री योगी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि ध्यान प्रत्येक मानव के जीवन का अनिवार्य अंग है। उन्होंने कहा कि यदि बचपन से ही बच्चों को ध्यान, आध्यात्मिक संस्कार और नैतिक शिक्षा प्रदान की जाए तो समाज में हिंसा, अशांति और अराजकता जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
अपने प्रवचन में योगी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि मनुष्य विभिन्न साधनाओं और उपचार पद्धतियों की ओर आकर्षित होता है, लेकिन ध्यान और ‘ॐ’ (ओंकार) का जप जीवन को वास्तविक सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि प्रणव स्वरूप ओंकार परमपिता परमात्मा का मूल नाम है, जिसकी महिमा सभी धर्मों और आध्यात्मिक परंपराओं में किसी न किसी रूप में वर्णित है।
उन्होंने कहा कि ध्यान केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, जागरूक और सफल बनाने की सर्वोच्च कला है। सजगता, आत्मअनुशासन और नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति मानसिक तनाव, नकारात्मक विचारों और जीवन की अनेक समस्याओं पर सहज विजय प्राप्त कर सकता है।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और संत वाणी का श्रवण कर आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की। इस अवसर पर पारस सिंह, रामअवतार सिंह, कृष्णावतार सिंह, राजेश सिंह रघुवंशी, सुदर्शन सिंह, संतोष सिंह रघुवंशी, रामअवतार यादव, संजय सिंह, सुशील सिंह, चंद्रजी यादव, रोहित सिंह रघुवंशी, नीरज सिंह रघुवंशी, संदीप सिंह रघुवंशी, विष्णु सिंह रघुवंशी सहित अनेक श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
महायज्ञ के छठवें दिवस यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और सत्संग के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर समाज एवं विश्व कल्याण की कामना की।




