स्वर्वेद महामंदिर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतों ने आत्मजागृति, मानवता और सामाजिक समरसता का दिया संदेश; श्रद्धालु सेवा और सद्भाव का संकल्प लेकर लौटे
रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS, चौबेपुर (वाराणसी)। स्वर्वेद महामंदिर धाम, उमरहां में आयोजित सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव का मंगलवार को आध्यात्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने सत्संग में सहभागिता कर संतों के प्रेरणादायी विचारों को आत्मसात किया। पूरे परिसर में भक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने कहा कि “जहां अंधेरा हो, वहीं ज्ञान का दीप जलाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं के भीतर से होती है। जब तक व्यक्ति अपने मन के अज्ञान, अहंकार और अंधकार को दूर नहीं करता, तब तक बाहरी प्रकाश का वास्तविक महत्व अधूरा रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सद्गुरु कबीर साहेब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर सत्य, आत्मचिंतन और मानव सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
सद्गुरु आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि विवेक, धैर्य, क्षमा और शांति जैसे गुण मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना ही समाज को एकजुट और सशक्त बनाती है। कबीर साहेब की वाणी आज भी सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण के लिए उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी सदियों पहले थी।
महोत्सव के दौरान स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सेवा, व्यवस्था संचालन और अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समर्पण और सेवा भाव की संतों ने भी सराहना की।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालु सद्गुरु कबीर साहेब के प्रेम, सेवा, आत्मजागृति और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेकर अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। पूरे आयोजन ने आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को नई ऊर्जा प्रदान की।




