विभाग ने 1962 में मुआवजा दिए जाने का किया दावा, किसान बोले— यदि भुगतान हुआ है तो सार्वजनिक करें प्रमाण
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। मारकण्डेय महादेव गंगा-गोमती संगम मार्ग पर निर्माणाधीन सीसी सड़क परियोजना मुआवजा विवाद को लेकर चर्चा में है। परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के प्रभावित किसानों का आरोप है कि भूमि देने के बावजूद उन्हें एक वर्ष बीत जाने पर भी मुआवजा नहीं मिला। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इसे अपने अधिकारों के साथ अन्याय बताया है।
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपनी जमीन से संबंधित सभी आवश्यक अभिलेख लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को उपलब्ध करा दिए थे। विभाग की ओर से दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया गया था। हालांकि, अब विभाग यह कहते हुए भुगतान से इंकार कर रहा है कि संबंधित भूमि का मुआवजा वर्ष 1962 में ही वितरित किया जा चुका है।
प्रभावित किसानों ने विभाग के इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में वर्ष 1962 में मुआवजा दिया गया था, तो उसका प्रमाण और संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं। उनका आरोप है कि विभाग अब तक ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका है, जिससे उसके दावे की पुष्टि हो सके।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस परियोजना में केवल चार लोगों को मुआवजा देकर विभाग ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जबकि अन्य प्रभावित किसान आज भी अपने हक के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं। किसानों के अनुसार, उन्होंने कई बार जिला प्रशासन के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा सभी पात्र किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती और दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।




