नशामुक्त, विषमुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए धर्माचार्यों, विद्वानों व नागरिकों से जुड़ने की अपील
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से काशी में ‘विषमुक्त-नशामुक्त काशी’ अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के माध्यम से शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर समाज में प्रचलित विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और कुप्रथाओं पर सकारात्मक एवं तथ्यपरक संवाद शुरू करने का संकल्प लिया गया।
अभियान से जुड़े वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, मानसिक तनाव और नैतिक मूल्यों में गिरावट समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। ऐसे में जनजागरण के माध्यम से लोगों को शास्त्रसम्मत तथ्यों से अवगत कराते हुए नशामुक्त, विषमुक्त और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वक्ताओं ने बताया कि पूर्व में चिरईगांव क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन में 50 प्रतिशत से अधिक वयस्कों द्वारा तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति सामने आई थी। उनका कहना है कि नशे से जुड़ी कुछ मान्यताओं को धार्मिक स्वरूप दिए जाने के कारण समाज में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी है, जिसे प्रमाणिक एवं शास्त्रीय संवाद के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत भगवान विश्वनाथ एवं विषपान से जुड़ी धारणाओं, काशी की परंपराओं, वैष्णव संप्रदाय में तुलसी के महत्व तथा नवग्रह संबंधी विषयों पर विद्वानों एवं धर्माचार्यों के साथ विचार-विमर्श और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य किसी धर्म, परंपरा या आस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर सकारात्मक विमर्श स्थापित कर समाज को नशामुक्त, विषमुक्त और रोगमुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने सामाजिक संगठनों, धर्माचार्यों, विद्वानों तथा आम नागरिकों से इस जनजागरण अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की।




