अधिवक्ता ने जांच अधिकारी के समक्ष रखा पक्ष, निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की उठाई मांग
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, वाराणसी के शल्यतंत्र विभाग की प्रो. सुमन यादव की रीडर पद पर नियुक्ति से जुड़े कथित कूटरचित एवं गलत शैक्षणिक अनुभव प्रमाण-पत्र के मामले की जांच प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। रविवार को शिकायतकर्ता अधिवक्ता दीपक कुमार ने जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
शिकायतकर्ता दीपक कुमार का आरोप है कि प्रो. सुमन यादव ने श्री रणवीर संस्कृत विद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में असिस्टेंट टीचर (टीजीटी आयुर्वेद) के अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर रीडर पद प्राप्त किया, जिसमें कथित रूप से अनियमितताएं हैं। उन्होंने इस संबंध में जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
दीपक कुमार ने बताया कि वह प्रातः 11 बजे जांच अधिकारी प्रो. डी.के. मौर्य, प्रधानाचार्य एवं अधीक्षक, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, वाराणसी के समक्ष उपस्थित हुए और उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच समिति के सदस्य प्रो. माखन लाल, प्रधानाचार्य एवं अधीक्षक, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, झांसी बैठक में उपस्थित नहीं रहे। वहीं, प्रो. सुमन यादव, जो वर्तमान में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, अतर्रा (बांदा) की प्रधानाचार्य एवं अधीक्षक हैं, भी जांच के दौरान उपस्थित नहीं हुईं।
शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोष सिद्ध होने की स्थिति में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और समिति की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।




