मैदागिन से दशाश्वमेध घाट तक निकली यात्रा, सड़कों पर उमड़ा साधक-साधिकाओं का जनसैलाब
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। प्रातः स्मरणीय परम पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू आश्रम, वाराणसी की ओर से 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा मैदागिन चौराहे से प्रारंभ होकर बाबा विश्वनाथ मंदिर होते हुए दशाश्वमेध घाट तक पहुंची। हाथों में तिरंगा और जुबां पर ‘वंदे मातरम्’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ यात्रा में शामिल साधक-साधिकाओं ने देशभक्ति का संदेश दिया।
आश्रम के प्रबंधक ब्रह्मचारी बालक राम ने कहा कि तिरंगा भारत की पहचान और भारतवासियों की शान है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उन वीरों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने अपने आज का बलिदान देकर देश के भविष्य को स्वतंत्र बनाया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा केवल आसमान में नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के हृदय में लहराता है। ऐसे में शहीदों को नमन करते हुए स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को समझना और उसकी अक्षुण्णता बनाए रखना सभी का परम कर्तव्य है।
तिरंगा यात्रा के दौरान काशी की सड़कों पर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का उत्साह देखने को मिला। साधकों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति के नारों से वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत रहा।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के बीच दो हजार ऋषि प्रसाद पत्रिकाओं का निःशुल्क वितरण किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में साधक-साधिकाओं ने सहभागिता की।
तिरंगा यात्रा में प्रमुख रूप से विश्वनाथ भाई, बाबुल भाई, सतीश भाई, सत्य प्रकाश पाण्डेय, श्रीमती पूनम सिंह और मीरा पाण्डेय सहित सैकड़ों साधक-साधिकाएं मौजूद रहीं। यात्रा के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, शहीदों के सम्मान और स्वतंत्रता के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।




