राष्ट्रसेवा, अखंड भारत और राष्ट्रवादी विचारों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने मोहा मन, कजरी के सुरों से जीवंत हुई काशी की लोक संस्कृति
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर बाबतपुर स्थित बनारस किला में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रसेवा, राष्ट्रीय एकता, अखंड भारत और राष्ट्रवादी विचारों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रसेवा पर आधारित प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति हुई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध लोक संस्कृति कजरी गीत की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विपिन कुमार पाठक, क्षेत्र संयोजक, भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र रहे। समारोह में मुख्य अतिथि अशोक चौरसिया, काशी क्षेत्र अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा तथा ए.के. त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्र के प्रति समर्पण, अखंड भारत की भावना और राष्ट्रवादी विचारों को स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनके विचार आज भी युवाओं और देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष, राष्ट्रसेवा और राष्ट्रवादी विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से उनके जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
वहीं, कजरी की पारंपरिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में काशी और पूर्वांचल की लोक संस्कृति की मनमोहक छटा बिखेर दी। कलाकारों की प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
समारोह में भाजपा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों और जनसमुदाय ने कार्यक्रम की सराहना की तथा संयोजक डॉ. विपिन कुमार पाठक का सार्थक, भव्य एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रहित, राष्ट्रीय एकता एवं अखंड भारत के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा युवा पीढ़ी को उनके जीवन और आदर्शों से परिचित कराने का संदेश दिया गया।




