अखिल भारतीय श्रीरामचरितमानस अन्ताक्षरी प्रतियोगिता के पंचम संस्करण में छह टीमों ने लिया भाग, विजेताओं को पुरस्कार व ट्रॉफी से किया सम्मानित
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। महाराज बलवन्त सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गंगापुर में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर महाराज डॉ. विभूति नारायण सिंह स्मृति “अखिल भारतीय श्रीरामचरितमानस अन्ताक्षरी प्रतियोगिता” के पंचम संस्करण का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों की छह टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों, दोहों एवं पदों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर अपनी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुरुषोत्तम सिंह, प्रबंध समिति के सचिव प्रो. धर्मेंद्र कुमार मिश्र सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. अनुराग कुमार, प्रो. नलिनी श्याम कामिल, प्रो. रमेश चन्द्र पाठक तथा पंडित श्री राघवेंद्र पांडेय ‘राघव’ शामिल रहे। निर्णायकों ने निर्धारित नियमों एवं मानदंडों के आधार पर प्रतिभागी टीमों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।
प्रतियोगिता में महारानी बनारस महिला महाविद्यालय की खुशी कुमारी एवं ज्योति प्रजापति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। महाराज बलवन्त सिंह पीजी कॉलेज, मिर्जापुर-वाराणसी की अर्चना पटेल एवं प्रदीप पटेल की टीम द्वितीय स्थान पर रही। वहीं महारानी जयंती कुंवरी कन्या इंटर कॉलेज, चकिया, चंदौली की मुस्कान एवं आफरीन जहाँ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को नकद पुरस्कार, प्रमाण-पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों एवं निर्णायक मंडल ने विजेता प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश से आए प्रतिभागियों ने विशेष रूप से श्रीरामचरितमानस अन्ताक्षरी की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित अतिथियों, आचार्यों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सुना और सराहा। इसके साथ ही भजन की मनोहारी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व, श्रीरामचरितमानस की महत्ता तथा भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों में मानस की भूमिका पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से मर्यादा, त्याग, सेवा, करुणा, समन्वय और लोकमंगल जैसे मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
प्रो. धर्मेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण दायित्व है। श्रीरामचरितमानस भारतीय समाज के नैतिक एवं सांस्कृतिक जीवन को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
प्राचार्य प्रो. पुरुषोत्तम सिंह ने सभी प्रतिभागी टीमों, निर्णायक मंडल, अतिथियों एवं आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं ज्ञान-परंपरा से जुड़े आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री तथा विषय प्रवर्तन एवं अतिथि परिचय डॉ. अंजना ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद उपस्थित अतिथियों, प्रतिभागियों, आचार्यों एवं छात्र-छात्राओं में प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान महाविद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर रहा।




