नगर निगम के साथ श्रमदान करते हुए गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा—तीर्थ की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
वाराणसी। मणिकर्णिका तीर्थ पर श्रमदान और सेवा का अनुभव आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है। नगर निगम की टीम के साथ मणिकर्णिका घाट पर श्रमदान करते हुए गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि यहां सेवा करते समय ऐसा महसूस होता है, जैसे बाबा महादेव स्वयं सहायक और मार्गदर्शक हों।
उन्होंने कहा कि काशी का मणिकर्णिका घाट महाश्मशान की पवित्रता को धारण किए हुए है। इसे केवल अंतिम संस्कार का स्थल नहीं, बल्कि जीवन और मोक्ष के द्वार के रूप में भी देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव की उपस्थिति मानी जाती है और वे मोक्ष प्राप्ति के लिए तारक मंत्र प्रदान करते हैं। ऐसे पवित्र स्थल पर श्रमदान और जनसेवा विशुद्ध भक्ति एवं समर्पण का भाव पैदा करती है।
राजेश शुक्ला ने कहा कि तीर्थ स्थल पर किया गया श्रम अहंकार को दूर कर सेवा और कर्तव्य का एहसास कराता है। नमामि गंगे और नगर निगम की ओर से स्वच्छता अभियान चलाकर तीर्थों की पवित्रता बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है।
उन्होंने देश-विदेश से काशी आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों से अपील की कि वे मणिकर्णिका सहित सभी तीर्थ स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएं।




