श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन महाभारत और अमरकथा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया
(रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय)
चौबेपुर (वाराणसी)।चौबेपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का दूसरा दिन श्रद्धा और भक्ति की अनुपम छटा बिखेर गया। वेदाचार्य पंडित विष्णुकांत शास्त्री के सजीव और प्रेरणादायी प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और जीवन के आदर्श मूल्यों की ओर उन्मुख किया।
कथा के दौरान पंडित शास्त्री ने महाभारत के विविध प्रसंगों के माध्यम से धर्म की नींव परिवार को बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान हर धर्म का मूल आधार है। जहां बड़ों का सम्मान होता है, वहां सुख-शांति और समृद्धि स्वतः वास करती है।
अमरकथा का वर्णन करते हुए उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के संवादों को मोक्ष का संदेशवाहक बताया। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि आत्मा की अमरता और जीवन की क्षणभंगुरता का बोध कराती है। श्रीमद्भागवत को सभी शास्त्रों का सार बताते हुए उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, आत्मज्ञान और मोक्ष का पथ प्रशस्त करता है।
आयोजन स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। सुंदर सजावट और भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु एकाग्र होकर कथा का श्रवण कर रहे थे। यह भव्य आयोजन चंद्रशेखर तिवारी ‘मून’ जी द्वारा अपने दिवंगत पिता, न्यायमूर्ति श्री श्रीषनाथ तिवारी की 28वीं पुण्यतिथि की स्मृति में कराया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आस-पास के गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस शुभ अवसर का लाभ उठाएं और परिवार सहित कथा में सम्मिलित होकर पुण्य अर्जित करें।





