काशी में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद जी का 101वां वर्धान्ति महामहोत्सव के भव्य आयोजन में उमड़े श्रद्धालु
वाराणसी। काशी में मंगलवार को ब्रह्मलीन द्वयपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 101वां वर्धान्ति महामहोत्सव श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के आदेशानुसार संतों, भक्तों और काशीवासियों ने मिलकर इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
महोत्सव का शुभारंभ स्वस्तिवाचन और गणेश पूजन से हुआ। इसके बाद ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की चरण पादुका का पूजन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। वैदिक आचार्यों दीपेश दुबे, विनय भूषण तिवारी, ओमप्रकाश पांडेय, करुणा शंकर मिश्र, भूपेंद्र मिश्र, शिवकांत मिश्र और धीरज तिवारी के आचार्यत्व में रुद्राभिषेक कर आरती व पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान चारों वेदों का पारायण भी किया गया। यजमान की भूमिका कृष्ण कुमार द्विवेदी ने निभाई।
शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने जानकारी दी कि ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने जीवन में कई ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दो बार जेल यात्रा की, अंग्रेजों के खिलाफ गांव को खाली करवाया, राम जन्मभूमि व राम मंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में करवाने में योगदान दिया, रामसेतु की रक्षा की, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने में पहल की और 74 बार चातुर्मास व्रत पूर्ण कर विश्व में अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा देशभर में अनेक अस्पताल, गौशालाएं, वृद्धाश्रम और वेद विद्यालय निःशुल्क संचालित कराए गए। लाखों लोगों को पुनः सनातन धर्म में लाने का भी श्रेय उन्हें जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्धान्ति महोत्सव देश-विदेश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मुंबई, काशी, ज्योतिर्मठ और मध्यप्रदेश समेत कई स्थानों पर करोड़ों श्रद्धालु इस अवसर पर पूजन-अर्चन व भजन-कीर्तन कर रहे हैं। श्रीविद्यामठ में दिनभर भजन-कीर्तन के साथ महाभंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
महोत्सव में प्रमुख रूप से डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी, गौरीकेदारेश्वर मंदिर के मुख्य अर्चक नारायण शास्त्री, डॉ. गिरीश दत्त पांडेय, श्रीविद्या मठ प्रबंधक दीपेंद्र सिंह, अनिल पांडेय, रमेश उपाध्याय, कीर्ति हजारी शुक्ला, अभय शंकर तिवारी, सतीश अग्रहरी, सावित्री पांडेय, लता पांडेय, किरण शाही, लीला तिवारी, रिंकी सिंह, सुनीता जायसवाल, हीरा सिंह राजपूत, घनश्याम पटेल, अमला यादव सहित जगदगुरुकुलम के वैदिक छात्र, संत और भक्तगण उपस्थित रहे।




