गोत्र ही हिंदुओं की पहचान : शंकराचार्य
सुपौल (बिहार)। गौमाता की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित कराने की मांग को लेकर चल रहे राष्ट्रव्यापी धर्म आंदोलन के तहत सोमवार को सुपौल में आयोजित गौमतदाता संकल्प यात्रा में परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने सनातन धर्मावलंबियों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि गोत्र ही हिंदुओं की पहचान है, किंतु आज हिंदू इसे भूलते जा रहे हैं। अपने गोत्र और उसके महत्व को याद रखना हर सनातनधर्मी का परम कर्तव्य है।
सुपौल प्रवास के दौरान शंकराचार्य जी का गौभक्तों और स्थानीय नागरिकों ने पालकी में आरूढ़ कर भव्य स्वागत किया। पुष्पवर्षा और जयकारों के बीच कार्यक्रम स्थल तक लाए गए शंकराचार्य जी ने जनसमुदाय को संबोधित करते हुए गौमाता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि गौमाता 33 कोटि देवी-देवताओं की आश्रय स्थली हैं। हमारे जीवन में गुरु और ईश्वर का विशेष महत्व है, किंतु जब भी हम भोजन बनाते हैं, तो पहली रोटी गौमाता के लिए निकालते हैं। यही सनातन संस्कृति की पहचान है।
शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है जब हम गौमाता की रक्षा हेतु मतदान को ही अपना धर्म मानें। उन्होंने कहा कि पिछले 78 वर्षों से हम नेताओं पर भरोसा करते रहे, किंतु उन्होंने गोकशी रोकने के बजाय निहित स्वार्थ में इसे बढ़ावा दिया। अब हमें संकल्प लेना होगा कि किसी भी कीमत पर गौमाता के प्राणों की रक्षा करेंगे और गोकशी के पाप से स्वयं को बचाएंगे।
सभा के अंत में उन्होंने उपस्थित जनसमूह से दाहिना हाथ उठाकर गौमाता की रक्षा के लिए संकल्प करवाया।
कार्यक्रम के उपरांत शंकराचार्य जी महाराज फारबिसगंज के लिए रवाना हुए। मार्ग में कई स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। कुछ स्थलों पर भक्तों ने उनके चरण पादुका का पूजन कर स्वयं को धन्य किया।
इस अवसर पर प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी जी महाराज, स्वामी दिव्यानंद सागर जी, देवेंद्र पांडेय, राजीव झा, रामकुमार झा और शैलेन्द्र योगी ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। शंकराचार्य जी फारबिसगंज में ही रात्रि विश्राम करेंगे।




