गाय में निहित पवित्रता ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी : शंकराचार्य
गया, 24 सितम्बर। गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने एवं उनकी रक्षा के संकल्प के साथ चल रही गौमतदाता संकल्प यात्रा सोमवार को गया पहुंची। इस अवसर पर आयोजित संकल्प सभा में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने हजारों की संख्या में जुटे गौभक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि गाय पवित्रता की प्रतिमूर्ति है। यदि गौमाता की रक्षा नहीं की गई तो हम पवित्र और पापमुक्त कैसे रह पाएंगे?
उन्होंने कहा कि जैसे सूर्य की हजारों किरणों में मुख्य किरण प्रकाश देती है, वैसे ही गाय आयुष्य प्रदान करने वाली है। गौमाता से प्राप्त दूध, दही और घृत जीवन को दीर्घायु बनाते हैं। प्राचीनकाल में भोजन से पहले पत्तल पर गौघृत परोसने की परंपरा इसी कारण थी। पंचगव्य के सेवन से मनुष्य पापमुक्त हो जाता है। जहां गाय होती है वहां रोग और पाप का स्थान नहीं होता।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सतयुग के राजा गय की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विष्णु की आराधना से वह पवित्रता की प्रतिमूर्ति बने। यज्ञ हेतु उनके शरीर की आहुति से गया की यह धरती पावन हुई और यहां पिंडदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि गाय और गया दोनों ही पवित्र हैं, और इसी पवित्र धरती से हम सनातन धर्म की रक्षा का धर्मादेश देते हैं।
उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति तेजी से क्षीण हो रही है। चोटी, तिलक और कांछ अब विलुप्त हो चुके हैं। समलैंगिकता अपराध की श्रेणी से बाहर कर दी गई है और अश्लीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे समय में धर्मरक्षा हेतु समाज को संकल्पित होकर आगे बढ़ना होगा।
बिहार को क्रांति की धरती बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां से हमेशा नई दिशा मिली है। चाणक्य से लेकर जयप्रकाश नारायण तक, जब-जब जरूरत पड़ी, सत्ता पलटने का कार्य इसी धरती ने किया है।
इस दौरान मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि गया पहुंचने पर भक्त श्री डालमिया एवं मेहरबार परिवार द्वारा शंकराचार्य जी महाराज के चरण पादुका पूजन व आरती की गई। रात्रि विश्राम रामानुज मठ में हुआ।
संकल्प यात्रा में स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी, स्वामी श्रीनिधिररव्यानंद, संयोजक देवेंद्र पांडेय, शैलेन्द्र योगी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






