विकास, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज — डॉ. अम्बिका प्रसाद गौड़ (लेखक एवं शिक्षाविद)
वाराणसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया केंद्रीय बजट 2026–27 एक महत्वाकांक्षी और विकासोन्मुखी बजट के रूप में सामने आया है। यह बजट न केवल आर्थिक वृद्धि को गति देने का प्रयास करता है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस संकेत भी देता है।
पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा जोर
बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति देने के लिए 20 नए राष्ट्रीय राजमार्ग, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तथा टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास की योजनाएं शामिल की गई हैं। यह कदम रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
शिक्षा और युवाओं के लिए राहत
इस बजट की एक बड़ी विशेषता शिक्षा क्षेत्र पर विशेष फोकस है। उच्च शिक्षा के लिए 55,727 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 11 प्रतिशत अधिक है। इससे IITs, NITs, UGC और AICTE जैसे संस्थानों को मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही 15,000 स्कूलों में कंटेंट लैब स्थापित करने और 5 नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स के निर्माण की घोषणा छात्रों के कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देगी।
विदेशी शिक्षा में TCS राहत
टैक्स रिबेट के बजाय शिक्षा से जुड़े लाभ TCS (Tax Collected at Source) में छूट के रूप में दिए गए हैं। विदेशी शिक्षा के लिए भेजी जाने वाली राशि पर TCS दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है। इससे विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
पर्यटन, स्वास्थ्य और नए कानूनों की पहल
बजट में पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नई पहलों की घोषणा की गई है। पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन स्थलों के विकास और 1 अप्रैल 2026 से नए आयकर कानून को लागू करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है, जो कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम है।
समग्र दृष्टि में बजट
कुल मिलाकर, बजट 2026–27 गरीब, किसान, युवा और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने वाला प्रतीत होता है। यह बजट विकास, निवेश और मानव संसाधन पर संतुलित ध्यान देते हुए आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को और मजबूत करता है।
यह कहा जा सकता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह बजट भारत को स्थिरता, विकास और भविष्य की तैयारी की दिशा में आगे ले जाने का प्रयास है।





