कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान एवं दीपदान से मिलता है अनंत पुण्य : शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज
वाराणसी। कार्तिक मास की पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। इसे कार्तिकी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा और गंगा स्नान पर्व के रूप में भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और दीपदान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मनुष्य को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
श्री काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कार्तिक पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक है। इस दिन गंगा तटों पर स्नान कर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी का पूजन-आराधन करने से जीवन में सौभाग्य, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा को गंगा तटों पर दीपदान करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। दीपदान से अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का संदेश मिलता है। इस दिन दीपों की उजास से वातावरण में पवित्रता और श्रद्धा का अद्भुत संयोग निर्मित होता है।
शंकराचार्य ने प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि सभी लोग इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान, व्रत, दान और दीपदान अवश्य करें। इससे मनुष्य के जीवन में शुभता, सकारात्मकता, आशीर्वाद और कल्याण की प्राप्ति होती है।




