दस्तावेजों की जालसाजी और फर्जी लाइसेंस के सहारे हुआ करोड़ों का कारोबार
वाराणसी। कोतवाली पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने सोमवार को कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। दोनों ने पूछताछ में बताया कि उनके नाम पर शुभम जायसवाल द्वारा फर्जी फर्म बनवाकर हर माह 40 हजार रुपये कमीशन के रूप में दिए जाते थे।
सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली ने बताया कि अपराध नियंत्रण और फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के निर्देश पर अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में कफ सिरप कांड के दो आरोपितों को दबोचा गया। दोनों ने पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारी दी।
अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर फर्जी रेंट एग्रीमेंट, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य जाली दस्तावेज तैयार कर ड्रग लाइसेंस प्राप्त किया। इसके बाद उन्हीं लाइसेंसों का इस्तेमाल कर कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप खरीदी और गैर-औषधीय नशे के लिए अवैध रूप से सप्लाई की।
हरी ओम फार्मा (विशाल जायसवाल) ने 4,18,000 शीशी कफ सिरप शैली ट्रेडर्स (रांची) से खरीदकर 5 करोड़ से अधिक में बेच दिया। काल भैरव ट्रेडर्स (बादल आर्य) ने 1,23,000 शीशी कफ सिरप रांची से मंगाकर 2 करोड़ से अधिक में बेचा।
ई-वे बिल की जांच में भी जालसाजी पकड़ी गई। जिन वाहनों के नंबर ई-वे बिल में दर्ज थे, उनके मालिकों ने कहा कि उनका इन लेन-देन से कोई संबंध नहीं है।
अभियुक्तों ने बताया कि उनकी मुलाकात सिगरा स्थित अमित जायसवाल और शैली ट्रेडर्स के शुभम जायसवाल से हुई थी। दोनों ने कम समय में ज्यादा कमाई का लालच देकर उनके नाम पर फर्में बनवाईं।
प्रति माह 30–40 हजार रुपये नकद कमीशन मिलता था। फर्म के खाते में आने वाला पैसा तुरन्त शैली ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कराया जाता था। दिवेश जायसवाल को उनके बैंक खातों की पूरी जानकारी थी और वह ओटीपी लेकर लेनदेन कराता था।
अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि एक वर्ष में उनके नाम पर करीब 7 करोड़ रुपये का अवैध व्यापार हुआ, जबकि माल कभी उनकी दुकान पर आता ही नहीं था। ई-वे बिल और टैक्स इनवॉइस सिर्फ कागजों में तैयार किए जाते थे। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।




