शादी के डीजे के कंपन से गई रामसूरत निषाद की जान, तेज ध्वनि प्रदूषण फिर बना काल
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। लेढूपुर इलाके में सोमवार रात शादी के डीजे से उठे तेज कंपन और शोर ने छितौनी गांव के 50 वर्षीय रामसूरत निषाद की जीवनलीला समाप्त कर दी। वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के निवासी रामसूरत निषाद गोलगप्पे का ठेला लगाकर परिवार चलाते थे और पिछले दो वर्षों से हृदय संबंधी बीमारी से परेशान थे। चिकित्सकों ने उन्हें तेज आवाज और तनाव से दूर रहने की सलाह दी थी।
परिजनों के अनुसार, सोमवार को वे पत्नी और भतीजे के साथ माता आनंदमयी अस्पताल से दवा लेकर घर लौट रहे थे। लेढूपुर स्थित एक मैरिज लॉन के सामने बारात के डांस में डीजे और बुफर के तेज शोर से लगभग एक किलोमीटर तक सड़क पर जाम लगा था। ऑटो जाम में ऐसा फंसा कि निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा।
परिजनों ने बारातियों से हाथ जोड़कर डीजे व बुफर बंद करने की गुहार लगाई, लेकिन बारातियों ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि शादी में संगीत बंद नहीं किया जा सकता। इसी दौरान तेज कंपन, चीख–पुकार और अफरातफरी के बीच रामसूरत की हालत बिगड़ती चली गई और कुछ ही मिनटों में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अस्पताल ले जाने तक का समय भी नहीं मिल सका। घटना से परिजन सदमे में पुलिस को सूचना दिए बिना शव लेकर गांव लौट गए।
घटना की जानकारी मिलने पर ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ काम करने वाली संस्था सत्या फाउंडेशन के सचिव चेतन उपाध्याय मंगलवार सुबह पीड़ित परिवार से मिले। उन्होंने बताया कि भारत के कानून के अनुसार दिन में भी अधिकतम 70–75 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि की अनुमति नहीं है, जबकि किसी भी डीजे या बुफर सिस्टम को इतनी कम ध्वनि पर चलाना तकनीकी रूप से संभव नहीं। ऐसे में तेज साउंड सिस्टम स्वतः ही अवैध श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने कहा कि तेज ध्वनि वाले डीजे–बुफर के खिलाफ पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि लोगों में कानून का भय बना रहे। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कानून में संशोधन कर खुले स्थानों, सड़क और सार्वजनिक मार्ग पर केवल परंपरागत वाद्ययंत्रों के उपयोग की ही अनुमति देनी चाहिए।
घटना से पूरे इलाके में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि तेज आवाज वाले डीजे और बुफर अब तक कई लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा चुके हैं, लेकिन प्रशासन सख्ती नहीं बरत रहा है। रामसूरत की मौत ने एक बार फिर लापरवाही और ध्वनि प्रदूषण के खतरों की ओर ध्यान खींचा है।




