परमहंस हॉस्पिटल में अखंड गीता पाठ के उपरांत विशाल भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। कादीपुर कलां गांव स्थित परमहंस हॉस्पिटल प्रांगण में आयोजित यथार्थ गीता अखंड पाठ के उपरांत बृहस्पतिवार को हुए प्रवचन में ब्रह्मचारी जी महाराज ने कहा कि जो हृदयस्थ आत्मा को नहीं पहचानता, वह पुरुष होते हुए भी नपुंसक समान है। आत्मा शाश्वत, अविनाशी और पुरातन है। वह न कभी जन्म लेती है और न ही मृत्यु को प्राप्त होती है, केवल शरीर रूपी वस्त्र बदलती है।
उन्होंने कहा कि आत्मा, परमात्मा और ब्रह्म एक ही सत्य के पर्याय हैं। यज्ञ की प्रक्रिया ही कर्म है और यज्ञ से बचा अन्न ग्रहण करने वाले संतजन समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार सुबह स्वामी अड़गड़ानंद नंद जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। शक्तेसगढ़ से आए भक्तों ने यथार्थ गीता का अखंड पाठ आयोजित किया, जो बृहस्पतिवार को प्रवचन के साथ पूर्ण हुआ।
अखंड पाठ के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें कादीपुर कलां, धौरहरा, परानापुर, अजांव, गरथौली, बर्थरा खुर्द, चौबेपुर, छितमपुर, हड़ियाडीह, मुनारी सहित अनेक गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस मौके पर चंद्रशेखर सिंह, डॉ. नरेंद्र बहादुर सिंह, जय प्रकाश पांडेय, संतोष तिवारी, अजीत सिंह प्रधान, सूर्यनाथ यादव, श्याम प्रताप सिंह, रंजीत सिंह, परम हंस सिंह, अनिल सिंह, सुभाष सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक डॉ. बीर बहादुर सिंह ने सभी श्रद्धालुओं व अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।




