ढांका गांव में आयोजित किसान पाठशाला में मास्टर ट्रेनर ने दी आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। तिलहनी व दलहनी फसलों की बेहतर पैदावार के लिए मुख्य पोषक तत्वों के साथ सल्फर का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से सरसों की फसल में यूरिया की टॉपड्रेसिंग के समय सल्फर का उपयोग करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि तेल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। यह जानकारी शुक्रवार को कृषि विभाग की ओर से ढांका गांव में आयोजित मिलियन फार्मर्स स्कूल/किसान पाठशाला में मास्टर ट्रेनर देवमणि त्रिपाठी ने किसानों को दी।
उन्होंने किसानों से कृषि की आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती करने की अपील की। उप कृषि निदेशक अमित कुमार जायसवाल के निर्देशन में आयोजित दो दिवसीय किसान पाठशाला के पहले दिन दलहनी व तिलहनी फसलों की खेती से जुड़े प्रभावी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, हरी खाद का महत्व, रबी फसलों में खरपतवार नियंत्रण, कृषि में ड्रोन का प्रयोग तथा फार्मर रजिस्ट्री की उपयोगिता जैसे विषयों पर भी किसानों को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्राम प्रधान सुमन देवी ने कहा कि बदलते समय के साथ किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती करनी चाहिए, जिससे आय में वृद्धि हो सके। इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण दुबे, विनोद निषाद, अमरनाथ पाण्डेय, सत्यनारायण दुबे, प्रभु नाथ, गणेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




