विद्यालयी भ्रमण के माध्यम से बच्चों को मिल रहा भारतीय संस्कृति व स्वर्वेद का संदेश
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
वाराणसी। काशी स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम भावी पीढ़ी के संस्कार निर्माण का सशक्त और जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां निरंतर विभिन्न विद्यालयों के स्कूली बच्चों का शैक्षिक भ्रमण के तहत आगमन हो रहा है, जहां वे स्वर्वेद के दिव्य संदेशों के साथ भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और राष्ट्रचेतना से साक्षात्कार कर रहे हैं।
आधुनिक जीवन की चकाचौंध के बीच भी भारत की मूल सांस्कृतिक धरोहर से भावी पीढ़ी जुड़ी रहे, यह हर अभिभावक की अपेक्षा होती है। स्वर्वेद महामंदिर धाम में बच्चों को सत्य, अनुशासन, सेवा, सद्भाव, आत्मसंयम और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल संस्कारों का महत्व सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से समझाया जा रहा है।
अब तक लाखों बच्चे इस महामंदिर में आकर ऋषियों की धरोहर और स्वर्वेद के दिव्य संदेश से परिचित हो चुके हैं। इसी क्रम में बुधवार को भी हजारों स्कूली बच्चों ने महामंदिर धाम पहुंचकर दिव्य दर्शन, संस्कारात्मक शैक्षिक भ्रमण तथा प्रेरक मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त किया। बच्चों को निःशुल्क गुड़ के लड्डुओं का प्रसाद भी वितरित किया गया।
महामंदिर का शांत, पवित्र और ज्ञानमय वातावरण बच्चों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ रहा है। आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार आधारित दृष्टि प्रदान करने की इस पहल की सराहना शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा लगातार की जा रही है।
इस अवसर पर बच्चों को सरल एवं वैज्ञानिक पद्धति से ध्यान का अभ्यास भी कराया गया। सामूहिक ध्यान सत्र के माध्यम से बच्चों ने एकाग्रता, मानसिक शांति और आत्मसंयम का प्रत्यक्ष अनुभव किया। यह अभ्यास बच्चों को तनावमुक्त रखने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास, अध्ययन में एकाग्रता और सकारात्मक जीवन दृष्टि के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहा है।
स्वर्वेद महामंदिर धाम का यह निरंतर प्रयास है कि भावी पीढ़ी केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि संस्कारी, संवेदनशील और समाजोन्मुख नागरिक के रूप में विकसित हो।




