वाद की कार्यवाही पर रोक को लेकर कोर्ट में हुई तीखी बहस
वाराणसी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक) भावना भारती की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के पुराने मुकदमे में वादमित्र को हटाने संबंधी खारिज अर्जी में संशोधन किए जाने के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से वाद की अग्रिम कार्यवाही पर रोक लगाए जाने की दलील दी गई, जिस पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता मो. तौहीद खान ने अदालत को बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित मामलों की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई है, इसलिए इस वाद में भी सुनवाई नहीं हो सकती। इस पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि केवल मौखिक दलील के आधार पर किसी मुकदमे की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती। यदि रोक से संबंधित कोई आग्रह है तो उसे लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि उस पर विधिवत सुनवाई हो सके।
वादमित्र ने अदालत को यह भी बताया कि यह जनप्रतिनिधि वाद है, जिसे उच्च न्यायालय ने छह माह के भीतर निस्तारित करने का आदेश दिया है। उसी आदेश के अनुपालन में सुनवाई आगे बढ़ रही है। केवल मौखिक दलील देकर कार्यवाही रोकने की बात करना मुकदमे को लंबित करने का प्रयास है। यदि लिखित प्रार्थना पत्र दिया जाता है तो अन्य पक्षकारों की ओर से आपत्ति दाखिल कर पूरी सुनवाई के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए।
अदालत ने वक्फ बोर्ड को कार्यवाही पर रोक संबंधी लिखित अर्जी दाखिल करने का अवसर देते हुए अगली सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तिथि नियत की है। पिछली सुनवाई में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से बहस पूरी हो चुकी है।
गौरतलब है कि मूल वादी हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन बेटियों ने वादमित्र को हटाने की अर्जी दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद संबंधित अर्जी में संशोधन के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है, जिसमें वादी संख्या पांच व वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग की गई है।




