महाप्रबंधक सोमेश कुमार बोले—हिंदी में मौलिक चिंतन से ही होगा विकसित भारत का निर्माण
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के राजभाषा विभाग द्वारा शुक्रवार को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की छमाही बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता नराकास अध्यक्ष एवं बरेका महाप्रबंधक श्री सोमेश कुमार ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए श्री सोमेश कुमार ने कहा कि वाराणसी आध्यात्म और संस्कृति के साथ-साथ साहित्य एवं भाषा के क्षेत्र में भी देश-दुनिया को दिशा देने वाला नगर रहा है। हिंदी भाषा को समृद्ध करने में वाराणसी का योगदान अनूठा है। इसी का परिणाम है कि गांधीनगर (गुजरात) में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में वाराणसी को प्रशंसनीय श्रेणी का सम्मान प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए तकनीकी क्षेत्रों में मौलिक चिंतन एवं लेखन अत्यंत आवश्यक है, जो हिंदी भाषा के माध्यम से ही व्यापक स्तर पर संभव है। साथ ही उन्होंने संसदीय राजभाषा समिति के निर्देशों का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी में अधिकाधिक कार्य कर देश को और सशक्त बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के प्रतिनिधि डॉ. छबिल कुमार मेहेर ने विभिन्न कार्यालयों से प्राप्त राजभाषा संबंधी आंकड़ों की समीक्षा की और भविष्य में उनमें सुधार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल कंठ में नहीं, बल्कि हृदय में धारण करने की आवश्यकता है।
केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के प्रतिनिधि श्री सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने सभी केंद्रीय कार्यालयों से राजभाषा नीति का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
बैठक में केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, केंद्रीय निगमों एवं स्वायत्तशासी संगठनों के विभागाध्यक्षों व प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए और हिंदी के अधिकतम प्रयोग का संकल्प




