देशी गाय से 30 एकड़ तक संभव प्राकृतिक खेती, किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। कृषि विभाग द्वारा शनिवार को लक्ष्मीसेनपुर में आयोजित किसान पाठशाला में गो-आधारित प्राकृतिक खेती पर विस्तार से चर्चा की गई। मास्टर ट्रेनर देवमणि त्रिपाठी ने किसानों को बताया कि देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ तक सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं, जो प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं।
उन्होंने बताया कि देशी गाय के गोबर और गोमूत्र में गुड़, बेसन तथा जीवाणु युक्त मिट्टी मिलाकर किण्वन (फर्मेंटेशन) प्रक्रिया से जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत तैयार किया जाता है। इनके खेतों में प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि मात्र एक देशी गाय से लगभग 30 एकड़ तक प्राकृतिक खेती संभव है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मास्टर ट्रेनर ने कहा कि किसानों को अपनी आय दोगुनी करने के लिए धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से हटकर अन्य फसलों पर ध्यान देना होगा। कृषि विविधीकरण अपनाते हुए खेती के साथ बागवानी, फूल, सब्जी एवं मत्स्य पालन को शामिल करने से कम लागत में अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
किसान पाठशाला की अध्यक्षता कर रहे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि लक्ष्मण सिंह ने किसानों से जागरूक होकर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, पीएम प्रणाम योजना के अंतर्गत आईएनएम (इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट) के महत्व तथा कृषि उत्पादन में एसपीओ की भूमिका पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर नकुल सिंह, शिवप्रसाद यादव, दयाशंकर, मनोहर, जंग बहादुर, जयेश यादव सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




