छप्पन भोग की झांकी, रुक्मिणी विवाह व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
वाराणसी। माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा विश्व कल्याण की कामना से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के क्रम में सोमवार को छप्पन भोग की भव्य झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। व्यासपीठ से पं. संजय शास्त्री (प्रधान अर्चक, श्री श्याम मंदिर) ने कथामृत का रसपान कराया।
कथा के प्रथम दिन शोभायात्रा के उपरांत श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। सोमवार को विशेष रूप से छप्पन भोग, रुक्मिणी विवाह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया। बताया गया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बाल्यकाल से ही भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार कर उनसे प्रेम करती थीं। किंतु उनके भाई रुक्मी, श्रीकृष्ण से शत्रुता रखते थे और उन्होंने रुक्मिणी का विवाह चेदि नरेश शिशुपाल से तय कर दिया। इससे व्यथित होकर रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को पत्र भेजा। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर शिशुपाल व रुक्मी से युद्ध किया और उन्हें पराजित कर द्वारका ले जाकर विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया। इस प्रसंग ने भक्तों को प्रेम, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
प्रचार मंत्री गौरव राठी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक संदेश दिया जा रहा है और विश्व कल्याण की भावना को जागृत किया जा रहा है।
इस अवसर पर संगठन की अध्यक्ष कविता मारू, मंत्री कुमुद चांडक, तनु चांडक, सुनीता राठी, संगीता सोनी, संतोष शारडा, मधु मल, किशोर मुंडा, अनिल झवर, लोकेंद्र करवा, लाल चांडक, मधु राठी, अलका बाहेती, शशि राठी, सुधा डागा, मंजू झवर, सुषमा कोठारी, वीणा मुंडा, सरिता दमानी सहित अनेक महिला पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।




