नववर्ष पर उमड़ा आस्था का सैलाब, साढ़े तीन लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना, पर्यटन और शिक्षा का एक सशक्त संगम बनकर उभर रहा है। नववर्ष एक जनवरी के अवसर पर महामंदिर धाम श्रद्धा, शांति और अनुशासन का जीवंत प्रतीक बना रहा।
नववर्ष के पावन दिन प्रातः काल से लेकर रात्रि नौ बजे तक श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन जारी रहा। पूरे दिन चले इस अविराम प्रवाह में करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालुओं की सहभागिता दर्ज की गई, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी यहां पहुंचे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद स्वर्वेद महामंदिर धाम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हुई है। इसका विशाल परिसर, भव्य वास्तुकला, अद्वितीय शिल्पकला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।
महामंदिर परिसर में पत्थरों से निर्मित ऋषि-ऋषिकाओं, हाथियों सहित अन्य सांस्कृतिक आकृतियां भारतीय दर्शन, संस्कृति और सनातन परंपरा की सजीव झलक प्रस्तुत करती हैं। ये कलात्मक संरचनाएं आगंतुकों को आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास से जोड़ती हैं।
स्वर्वेद महामंदिर धाम को विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्रों में शामिल किया जाता है। यहां ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के लिए विशेष और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई हैं। साधकों के लिए शांत वातावरण, अनुशासित व्यवस्था और आध्यात्मिक मार्गदर्शन इसकी विशेष पहचान है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि महामंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। नववर्ष पर यहां आकर उन्होंने आत्मिक शुद्धि, मानसिक संतुलन और नए संकल्प के साथ वर्ष की शुरुआत की।




