अदालत ने सुनाई 20-20 वर्ष के साधारण कारावास व अर्थदंड की सजा
वाराणसी। लूट की नीयत से हत्या कर शव को छिपाने के मामले में अदालत ने दो नाबालिगों को दोषी करार देते हुए दंडित किया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट द्वितीय) नितिन पाण्डेय की अदालत ने दोनों बाल अपचारियों को दोषी पाते हुए 20-20 वर्ष के साधारण कारावास तथा 18-18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। नाबालिग होने के कारण अर्थदंड की राशि उनके संरक्षक माता-पिता द्वारा अदा की जाएगी। यदि संरक्षक अर्थदंड जमा नहीं करते हैं तो बाल अपचारियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया है कि किशोर न्याय बोर्ड की विधि-व्यवस्था के अनुसार बाल अपचारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह तथा वादी की ओर से अधिवक्ता संतोष सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, परमानंदपुर, शिवपुर निवासी वादी अरुण कुमार ने एक जनवरी 2019 को थाना लोहता में तहरीर दी थी। तहरीर में बताया गया था कि उसके मोबाइल पर उसके पिता के मोबाइल से सूचना मिली कि पिसौर पुल के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा है।
सूचना मिलने पर जब वादी मौके पर पहुंचा तो पाया कि शव उसके बड़े पिता प्रेमचंद सिंह निवासी कविरामपुर, बड़ागांव का है, जो उस समय परमानंदपुर, शिवपुर में मकान बनवाकर रह रहे थे। प्रथम दृष्टया प्रतीत हुआ कि लूट के इरादे से उनकी हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से वहां फेंक दिया गया था।
इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान दोनों बाल अपचारियों के नाम प्रकाश में आए, जिसके बाद उन्हें आरोपित बनाया गया। सुनवाई के उपरांत अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।




