विशेष न्यायाधीश की अदालत ने मो. फतेह अली खान को नहीं दी राहत
वाराणसी। बिना अनुमति जुलूस निकालकर ‘आई लव मोहम्मद’ के नारे लगाते हुए कथित रूप से मामले को सांप्रदायिक रंग देने के प्रकरण में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी मो. फतेह अली खान की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी संतोष तिवारी ने प्रभावी पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार, वादी उपनिरीक्षक विशाल विक्रम सिंह, चौकी प्रभारी मदनपुरा थाना दशाश्वमेघ ने तहरीर देकर बताया कि 24 सितंबर 2025 को वह फैंटम-14 के कर्मचारियों के साथ चौकी क्षेत्र में गश्त पर थे। इसी दौरान जानकारी मिली कि मदनपुरा क्षेत्र के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के मौलाना शाहजेब मुहम्मदी, आवेश राजा (मदनी राजा बरकती ग्रुप), हाजी हारुन, हाफिज अब्दुल कादिर सहित 40-50 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बिना पूर्व अनुमति के जुलूस निकाला गया।
आरोप है कि जुलूस के दौरान डीजे बजाकर, बैनर-पोस्टर लगाकर नारेबाजी की गई, जिससे आवागमन बाधित हुआ और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना से स्थानीय क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल उत्पन्न हो गया। अभियोजन का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से जानबूझकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया गया।
विवेचना के दौरान सदानंद बाजार, रामपुरा निवासी मो. फतेह अली खान का नाम प्रकाश में आने पर पुलिस ने उन्हें आरोपी बनाया। इसके बाद आरोपी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद अदालत ने आरोपी को कोई राहत देते हुए अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।




