अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने परिवाद स्वीकार कर स्टेट केस के रूप में कार्यवाही के दिए आदेश
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, कोर्ट संख्या–12 जौनपुर ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए आठ आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश वाद संख्या आज्ञा सं0-बी 11/2025 में प्रस्तुत परिवाद के आधार पर पारित किया गया।
न्यायालय ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत यह पाया कि आरोपियों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। न्यायालय की राय में अभियुक्तों को तलब किया जाना न्यायोचित है, जिसके आधार पर प्रकरण को स्टेट केस के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया गया।
न्यायालय के आदेश के अनुसार जिन अभियुक्तों को तलब किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं—
जावेद अहमद पुत्र सल्लाउद्दीन खलील (निवासी मानी कलां),
मोहम्मद खुशीद पुत्र जमालुद्दीन (निवासी मानी कलां),
नूरुन निशा पत्नी अंसार (निवासी मानी कलां),
बेलाल उर्फ बलाउद्दीन पुत्र जमालुद्दीन (निवासी मानी कलां),
मोहम्मद अलकमा खान पुत्री अब्दुल रफीक (निवासी सुम्बुलपुर),
तस्मा खातून पत्नी मोहम्मद अजीज (निवासी सुम्बुलपुर),
मोहम्मद जाफिर पुत्र हाजी जमील (निवासी छित्तेपुर, आजमगढ़),
फखरे आलम पुत्र अब्दुल हमीद (निवासी छित्तेपुर, आजमगढ़)।
न्यायालय ने अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (छल द्वारा प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का प्रयोग), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के अंतर्गत तलब किया है।
साथ ही नई विधि के अनुरूप यह प्रकरण बीएनएस की धारा 352, 351 एवं 61(2) से भी संबद्ध बताया गया है।
न्यायालय ने आदेश दिया है कि प्रकरण को स्टेट केस के रूप में दर्ज कर सभी अभियुक्तों को समन जारी किया जाए तथा उन्हें 06 फरवरी 2026 तक न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इस आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।





