‘सामान्य जाति के लिए काला कानून, सामाजिक सौहार्द पर खतरा’ — शशिप्रताप सिंह
वाराणसी। यूजीसी रिफॉर्म 2026 को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। मंगलवार को नेशनल इक्वल पार्टी के संयोजक शशिप्रताप सिंह ने क्षेत्रीय मीडिया से बातचीत में इस प्रस्तावित कानून को सामान्य जाति के लिए “कैंसर से भी खतरनाक” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून मंडल कमीशन की तर्ज पर लाया गया है, जिससे समाज में आपसी भाईचारा कमजोर होगा।
शशिप्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी रिफॉर्म लागू होने से पहले समाज में आपसी सौहार्द बना हुआ था, लेकिन अब इसे जानबूझकर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी को केवल पिछड़ा और दलित वर्ग का वोट चाहिए, जबकि सामान्य जाति के हितों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य जाति इस कानून का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। “हमारे हाथ में कलम है, और कलम ही हमारी तलवार है। शिक्षा के माध्यम से इस काले कानून का मुकाबला किया जाएगा,” उन्होंने कहा।
नेशनल इक्वल पार्टी संयोजक ने सरकार पर समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले से घबराने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस नीति का राजनीतिक असर आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से दिखना शुरू हो जाएगा और 2027 तक जनता “जुमलेबाजी और विनाशकारी नीतियों” का जवाब दे देगी।
शशिप्रताप सिंह ने यह भी कहा कि देशभर में भाजपा के 165 सामान्य जाति के सांसद, सैकड़ों विधायक और एमएलसी होने के बावजूद इस मुद्दे पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। उन्होंने इसे “अत्यंत शर्मनाक” बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की चुप्पी सामान्य समाज के साथ विश्वासघात है।




