जयरामपुर में श्रीरामचरितमानस कथा का द्वितीय दिवस, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। जयरामपुर में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। पंचवटी से पधारे कथावाचक स्वामी अचलानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में रामचरितमानस की रचना में माताओं के विशेष योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वामी अचलानंद जी महाराज ने कहा कि रामचरितमानस की प्रत्येक कड़ी मातृअनुकंपा से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि माँ तुलसी की कृपा से तुलसी का प्राकट्य हुआ, देवी रत्नावली की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास का जीवन दिशा प्राप्त करता है। माँ कौशल्या एवं सतरूपा की कृपा से बालकाण्ड, कैकेयी के माध्यम से अयोध्याकाण्ड तथा शबरी की कृपा से अरण्यकाण्ड की भावपूर्ण रचना और व्याख्या संभव हुई।
कथावाचन के दौरान मनु–सतरूपा की याचना “चाहहु तुम्हहि समान सुत” का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने भगवान के पुत्र रूप में अवतरित होने के वरदान की मार्मिक व्याख्या की, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।
कथा के अंत में सीता–राम नाम का भजन गूंजते ही पूरा पंडाल राममय हो गया। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ द्वितीय दिवस की कथा संपन्न हुई। इस अवसर पर पंडित यजमान रँगीले मिश्र, सत्यम, शिवम एवं सुंदरम मिश्र द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।




