जिला कृषि अधिकारी ने बताया—अत्यंत विषैला कीटनाशक, केवल अधिकृत एजेंसियां ही करें उपयोग
चंदौली। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने एल्युमिनियम फॉस्फाइड (एएलपी) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि यह एक पंजीकृत लेकिन प्रतिबंधित श्रेणी का कीटनाशक है। सार्वजनिक जोखिम को रोकने के उद्देश्य से इसकी बिक्री और उपयोग पर कड़े कानूनी प्रावधान लागू हैं।
उन्होंने बताया कि कीटनाशी नियम, 1971 के नियम 19 के अंतर्गत एल्युमिनियम फॉस्फाइड की पैकिंग पर चमकीला लाल लेबल लगाना अनिवार्य है, जो इसे “अत्यंत विषैला” दर्शाता है। लेबल पर आवश्यक चेतावनियां, विषाक्तता के लक्षण तथा प्राथमिक उपचार के उपाय स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार इस कीटनाशक का कोई विशिष्ट विषनाशक उपलब्ध नहीं है, इसलिए विषाक्तता की स्थिति में केवल लक्षणात्मक एवं सहायक चिकित्सा ही संभव है।
जिला कृषि अधिकारी ने आगे बताया कि कीटनाशी नियम, 1971 के नियम 41 के अनुसार निर्माताओं एवं वितरकों को उन परिसरों में, जहां कीटनाशकों का भंडारण किया जाता है, पर्याप्त मात्रा में प्राथमिक उपचार की दवाएं और आवश्यक चिकित्सकीय सामग्री रखना अनिवार्य है। यह व्यवस्था सांस के माध्यम से, त्वचा के संपर्क से या निगलने से उत्पन्न विषाक्तता के मामलों के उपचार हेतु आवश्यक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि एल्युमिनियम फॉस्फाइड एक अत्यंत विषैला रसायन है और यदि इसका उपयोग लेबल व लीफलेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार नहीं किया गया, तो यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए खुदरा विक्रेताओं, डीलरों एवं निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि एएलपी की बिक्री अनधिकृत व्यक्तियों या आम जनता को न की जाए।
जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एल्युमिनियम फॉस्फाइड का उपयोग केवल सरकारी एजेंसियों अथवा अधिकृत कीट नियंत्रण ऑपरेटरों (पीसीओ) द्वारा ही किया जाना चाहिए। कीटनाशी अधिनियम, 1968 अथवा कीटनाशी नियम, 1971 का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित डीलरों एवं खुदरा विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सभी हितधारकों के मार्गदर्शन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा भारतीय मानक आईएस 4015:1998 प्रकाशित किया गया है, जिसका अनुपालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।





