झारखंड बैंक डकैती कांड से जुड़े तीन शातिर गिरफ्तार, करोड़ों का सोना और 20 लाख नकद बरामद
वाराणसी। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की वाराणसी इकाई और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय बैंक डकैती गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने सारनाथ क्षेत्र से गिरोह के सरगना समेत तीन कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों के कब्जे से करीब एक किलो सोना, 20 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन बरामद किया गया है।
झारखंड के चर्चित बैंक डकैती कांड के खुलासे के लिए यूपी एसटीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर 1 मई 2026 को सारनाथ थाना क्षेत्र के सिंहपुर इलाके में घेराबंदी कर तीनों बदमाशों को दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों में मो. अफजल निवासी नवादा (बिहार), पंकज सिंह उर्फ रौनक सिंह निवासी गोरखपुर तथा सौरभ यादव उर्फ सोनू निवासी मऊ शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों लंबे समय से संगठित गिरोह बनाकर बैंक डकैती की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।
24 अप्रैल 2026 को झारखंड के हजारीबाग जनपद स्थित बरही क्षेत्र में बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा में हथियारबंद बदमाशों ने दिनदहाड़े डकैती की थी। बदमाशों ने बैंक कर्मचारियों को बंधक बनाकर करीब 4 किलो सोना और भारी मात्रा में नकदी लूट ली थी।
घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू हुई। झारखंड पुलिस की सूचना पर यूपी एसटीएफ वाराणसी ने गिरोह की तलाश तेज की और आखिरकार अपराधियों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 912.22 ग्राम स्वर्ण आभूषण, 20 लाख रुपये नकद, छह मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन बरामद किया है। बरामद माल की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
पूछताछ में आरोपियों ने कई राज्यों में गोल्ड लूट की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार गिरोह ने पश्चिम बंगाल, कोलकाता, बिहार और उत्तराखंड में कई बैंक एवं गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को निशाना बनाया था।
अभियुक्तों ने वर्ष 2013 में दुर्गापुर से 36 किलो सोना, 2015 में कोलकाता से 14 किलो तथा 2022 में पटना से 8 किलो सोना लूटने की बात कबूल की है।
एसटीएफ जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह बैंक के कैश से ज्यादा गोल्ड लॉकर को निशाना बनाता था। अपराधी वारदात से पहले कई सप्ताह तक बैंक की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था की रेकी करते थे। लूटे गए सोने को बेचकर आरोपी रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी में निवेश करते थे।
फिलहाल तीनों अभियुक्तों को सारनाथ थाने में दाखिल कर आगे की विधिक कार्रवाई झारखंड पुलिस द्वारा की जा रही है। वहीं गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।




