छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित, भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर दिया गया विशेष बल
(रिपोर्ट: विवेक राय)
वाराणसी। पाणिनि कन्या महाविद्यालय में आयोजित पंद्रह दिवसीय “वैदिक चेतना शिविर” का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुए कार्यक्रम में छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. महेन्द्र नाथ तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक परंपराएं भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने छात्राओं को नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे शिविर युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मंजरी त्रिवेदी ने वैदिक ज्ञान की वर्तमान समय में उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से भारतीय संस्कृति को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्या नंदिता शास्त्री ने की। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी शिक्षकों, छात्राओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं के व्यक्तित्व विकास और संस्कार निर्माण में सहायक होते हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति विमर्शिनी ने बताया कि शिविर के दौरान योग, वैदिक अध्ययन, संस्कार शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, श्लोक-पाठ, भाषण प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से आई कक्षा 4 से 12वीं एवं शास्त्री वर्ग की लगभग 140 छात्राओं ने शिविर में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य छात्राओं को वैदिक संस्कृति, भारतीय जीवन-मूल्यों और संस्कारों की व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना था।
समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनामिका आर्या ने किया, जबकि अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. रासबिहारी पाण्डेय, डॉ. जनमेजय तिवारी, डॉ. सुधा श्रीवास्तव, डॉ. कीर्ति पाठक सहित महाविद्यालय के समस्त आचार्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।




