राष्ट्रीय सम्मान के साथ मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार, शस्त्र सलामी के बीच नम आंखों से दी गई विदाई
(रिपोर्ट : विवेक राय)
वाराणसी। चोलापुर थाना क्षेत्र के सहडीह गांव निवासी एवं वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर योद्धा, सेवानिवृत्त सैनिक रामनारायण पांडेय का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित इस वीर सपूत को पूरे सैन्य सम्मान और राष्ट्रीय गौरव के साथ अंतिम विदाई दी गई।
शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर पूरे सम्मान के साथ वाराणसी के पावन मणिकर्णिका घाट पहुंचाया गया, जहां सैन्य परंपराओं के अनुरूप अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों ने शस्त्र सलामी देकर अपने साथी योद्धा को श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी। देशभक्ति के नारों और भावुक माहौल के बीच उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
स्वर्गीय रामनारायण पांडेय ने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनकी वीरता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति आज भी क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे तथा युवाओं को राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देशभक्ति का संदेश देते रहे।
उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शुभचिंतक शामिल हुए। पूरे गांव ने अपने वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार में उनके तीन पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
इस अवसर पर रिटायर कर्मचारी संघ एवं पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रामनारायण पांडेय का जीवन राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यपरायणता और समर्पण का अनुपम उदाहरण था। उनका योगदान और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। उनके निधन से समाज और पूर्व सैनिक समुदाय ने एक सम्मानित एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है।




