ग्रामीणों की बहादुरी से बची तीन बच्चों की जान, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने चलाया रेस्क्यू अभियान
रिपोर्ट : विवेक राय
SHREE 7NEWS, वाराणसी। चोलापुर थाना क्षेत्र के दानगंज चौकी अंतर्गत ककरहा घाट (ग्राम सभा मोहनदासपुर) के पास बुधवार को गोमती नदी में नहाने गए दो मासूम बच्चों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं स्थानीय गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और घंटों चले रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों बच्चों के शव बरामद किए गए।
जानकारी के अनुसार लेदूपुर निवासी यूनुस का 10 वर्षीय पुत्र अयान तथा चौबेपुर थाना क्षेत्र के कौवापुर निवासी वारिस का 11 वर्षीय पुत्र जिशान गर्मी की छुट्टियां बिताने अपने ननिहाल सुल्तानीपुर गांव आए हुए थे। बुधवार सुबह दोनों बच्चे गांव के अन्य बच्चों के साथ गोमती नदी में नहाने पहुंचे थे। इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नदी में एक साथ पांच बच्चे डूबने लगे थे। नदी के दूसरी ओर पशु चरा रहे एक किसान ने बच्चों को डूबता देख शोर मचाया। आवाज सुनते ही नदी किनारे रहने वाले सुखराज निषाद और उनके भतीजे अजय निषाद बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में कूद पड़े।
दोनों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए अल्तमस, अयान उर्फ कल्लू और गोलू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन अयान पुत्र यूनुस और जिशान पुत्र वारिस गहरे पानी में समा गए।
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी चोलापुर सधुबन राम गौतम, दानगंज चौकी प्रभारी जितेंद्र राजभर एवं पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। स्थानीय गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की गई। बाद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी बुलाया गया।
एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना, एसडीएम सदर समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य की निगरानी करते रहे।
कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर में जिशान का शव बरामद किया गया, जबकि अयान का शव देर शाम नदी से बाहर निकाला गया। थाना प्रभारी सधुबन राम गौतम ने बताया कि दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों में मातम छा गया। जिशान की मां सुल्ताना का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों के अनुसार जिशान तीन भाइयों और तीन बहनों में दूसरे नंबर पर था, जबकि अयान अपने तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। दोनों बच्चे आपस में मौसेरे भाई थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ग्रामीण मदद के लिए आगे नहीं आते तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था। ग्रामीणों की बहादुरी से तीन बच्चों की जान बच गई। घटना के बाद सुल्तानीपुर, मोहनदासपुर समेत आसपास के गांवों में शोक और गम का माहौल बना हुआ है।





