श्री कालकाजी मंदिर में पूजन-अर्चन के बाद भजन संध्या महोत्सव में संतों का भव्य सम्मान
रिपोर्ट : विवेक राय
SHREE 7NEWS, वाराणसी। राजधानी दिल्ली में आयोजित धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के दौरान भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज (श्रीकुल पीठ) के पावन सान्निध्य में नई दिल्ली स्थित प्राचीन एवं सिद्ध शक्तिपीठ श्री कालकाजी मंदिर में माँ भगवती कालका के दिव्य दर्शन, पूजन एवं आराधना का आयोजन संपन्न हुआ।
पूजन-अर्चन के उपरांत मंदिर के मुख्य पुजारी एवं संयुक्त सचिव पंडित दीपक भारद्वाज जी महाराज ने पूज्य महाराज जी का आत्मीय स्वागत कर आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर काशी के प्रसिद्ध शीतला मंदिर के महंत आदरणीय अवशेष पांडेय “कल्लू महाराज” तथा समाजसेवी विनीत त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
संतों एवं भक्तों ने माँ भगवती से राष्ट्र, समाज एवं मानवता के कल्याण की मंगलकामना की।
इसके बाद भजनपुरा स्थित माँ कालका वाहिनी द्वारा आयोजित भव्य भजन संध्या महोत्सव में पूज्य संतों का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम के आयोजक एवं माँ कालका मंदिर परिवार के महंत आशीष भारद्वाज जी, पंडित दीपक भारद्वाज जी, युवान भारद्वाज जी तथा आयोजन समिति के पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का भव्य स्वागत-सत्कार किया गया।
भक्ति संगीत, भजनों और माँ भगवती के जयघोष से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
अपने प्रेरक उद्बोधन में पूज्य डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी का कर्तव्य है।
उन्होंने समाज से धर्म, संस्कृति, सेवा और संस्कारों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
महंत कल्लू महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भजन, सत्संग और संतों का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण को बढ़ावा देने पर बल दिया।
पूज्य संतों के आशीर्वचनों ने श्रद्धालुओं का हृदय जीत लिया। भजनपुरा की जनता ने जिस आत्मीयता और श्रद्धा के साथ संतों का स्वागत किया, वह कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही। संतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सुख, शांति, समृद्धि एवं धर्ममय जीवन का आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन माँ भगवती के जयघोष, भजन-कीर्तन एवं सामूहिक मंगल प्रार्थना के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल भक्ति और श्रद्धा का उत्सव बना, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणादायी संदेश देकर गया।



