सिफरी के रैंचिंग कार्यक्रम से मत्स्य संपदा बढ़ाने और गंगा संरक्षण पर जोर
SHREE 7NEWS, प्रयागराज। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी), प्रयागराज द्वारा गंगा एवं यमुना के पावन संगम तट पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में 5000 भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों — कतला, रोहू एवं मृगल मछलियों के अंगुलिका बीज छोड़े गए।
संस्थान द्वारा आयोजित रैंचिंग कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी में विलुप्त होती मत्स्य प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन करना रहा। वैज्ञानिकों ने बताया कि इससे नदी की मत्स्य संपदा में वृद्धि होगी और मछुआरों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता को बचाने के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मनाथ झा ने उपस्थित लोगों को विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
सिफरी के केंद्राध्यक्ष डॉ. बी.आर. चव्हाण ने गंगा नदी में मछली रैंचिंग के महत्व को बताते हुए कहा कि इससे नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. नीलम यादव ने गंगा की स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। वहीं प्रोफेसर डॉ. अश्विनी कुमार ने पौधों एवं पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को आवश्यक बताया।
प्रोफेसर डॉ. चौहान ने पर्यावरण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जबकि नमामि गंगे गंगा विचार मंच के संयोजक राजेश शर्मा ने गंगा सफाई के लिए चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी। गंगा टास्क फोर्स के सूबेदार सरजीत नायक ने भी लोगों से गंगा को स्वच्छ रखने की अपील की।
कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, मत्स्य पालकों, व्यवसायियों, स्नानार्थियों एवं गंगा तट पर रहने वाले लोगों ने भाग लिया और गंगा को स्वच्छ एवं संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अबसार आलम, डॉ. विकास कुमार, डॉ. जितेंद्र कुमार सहित शोधार्थी डॉ. संदीप कुमार मिश्र एवं सुश्री रिंकी कुमारी समेत कई लोग उपस्थित रहे।





