स्वैच्छिक रक्तदान एवं सामाजिक सरोकारों में उत्कृष्ट योगदान पर लखनऊ में किया गया सम्मानित, ‘सम्वेदना-2’ अभियान को मिली राष्ट्रीय पहचान
लखनऊ। सामाजिक सेवा और स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली अभ्युदय सेवा समिति को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। समिति के संरक्षक दिलीप दुबे को उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित नेशनल सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ऑफ एक्सीलेंस (इंग्लैंड) से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित भव्य समारोह के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती बबीता सिंह चौहान तथा भारत सरकार के एमएसएमई कॉर्पोरेशन के स्टेट मिनिस्टर वैश्य नटवर गोयल ने दिलीप दुबे को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न एवं सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
अभ्युदय सेवा समिति को यह राष्ट्रीय सम्मान ‘सम्वेदना-2’ अभियान के अंतर्गत सफलतापूर्वक आयोजित चार स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों, रक्तदान जागरूकता अभियान तथा मानव सेवा के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया। समिति लंबे समय से जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त उपलब्ध कराने और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रही है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद संरक्षक दिलीप दुबे ने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि अभ्युदय सेवा समिति के प्रत्येक पदाधिकारी, सदस्य और उन सभी रक्तवीर साथियों की है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर असंख्य मरीजों को नया जीवन देने में सहयोग किया। उन्होंने यह सम्मान समिति परिवार एवं सभी रक्तदाताओं को समर्पित करते हुए भविष्य में भी मानव सेवा के कार्यों को और अधिक व्यापक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
समिति अब तक 31 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन कर चुकी है। इसके अतिरिक्त 1500 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को ऑनलाइन माध्यम से रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान किया गया है। संस्था प्रतिदिन औसतन दो से तीन मरीजों की रक्त संबंधी आवश्यकता पूरी कराने में सक्रिय भूमिका निभा रही है तथा प्रत्येक माह नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित कर समाज सेवा का कार्य निरंतर आगे बढ़ा रही है।
समिति की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर पदाधिकारियों, सदस्यों, रक्तदाताओं एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक प्रेरणादायी उपलब्धि बताया।






