ढूंढीराज गणेश, माता अन्नपूर्णा एवं बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से पूजन, हजारों श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ निकाली धार्मिक यात्रा
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। श्रावण मास के प्रथम सोमवार के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ दल के तत्वावधान में यदुवंशी समाज द्वारा परंपरागत धार्मिक यात्रा एवं भव्य जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष यदुवंशी जंत्रलेश्वर यादव के नेतृत्व में हजारों यदुवंशी श्रद्धालुओं ने काशी की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए बाबा विश्वनाथ, ढूंढीराज गणेश महाराज एवं माता अन्नपूर्णा का विधि-विधान से जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ घुघरानी गली, हौज कटोरा स्थित काशी विश्वनाथ दल के प्रधान कार्यालय से हुआ, जहां स्वर्गीय तेजू सरदार के निवास पर मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं साफा पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। डमरू वादन और “हर-हर महादेव”, “हर-हर बम-बम” के गगनभेदी जयघोष के बीच धार्मिक यात्रा विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़ी।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु शीतला घाट पहुंचे, जहां मां गंगा का पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात माता शीतला मंदिर में दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं ने पुनः जल भरकर ढूंढीराज गणेश महाराज एवं माता अन्नपूर्णा का जलाभिषेक किया। अंत में काशी विश्वनाथ धाम के गर्भगृह में प्रवेश कर बाबा विश्वनाथ का वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि से अभिषेक एवं पूजन संपन्न किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक संजय यादव सहित डीआईजी अंगद यादव, मदन यादव, अजय यादव, रजनी यादव, बिहारी यादव, नरसिंह यादव, रवि यादव, एफसीआई प्रबंधक सोनू यादव, सूरज यादव, विशाल यादव, मनोज यादव, अमरेंद्र यादव, लवकुश यादव, राजेश यादव, शांभवी यादव, उमा यादव, सुधांशु यादव, हरि प्रसाद, आशुतोष, अनीता, दिया, गणेश सहित बड़ी संख्या में यदुवंशी समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर काशी विश्वनाथ दल के पदाधिकारियों ने शासन, प्रशासन एवं मंदिर प्रशासन द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय महासचिव निशा यादव तथा कार्यकारिणी सदस्य विशाल पांडेय, कृष्णा पांडेय एवं धीरज गुप्ता ने सभी श्रद्धालुओं एवं समाजबंधुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
धार्मिक आयोजन के दौरान स्वर्गीय तेजू सरदार द्वारा रचित यह दोहा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा—
“बाबा बाबा सब कहे, माई कहे ना कोय। बाबा के दरबार में, माई कहे सो होय।।”




