अलम, ताबूत और ज़ुलजनाह का निकला मातमी जुलूस, नौहा व मातम के बीच इमाम हुसैन की कुर्बानी को किया गया याद
रिपोर्ट विवेक राय
रामनगर (वाराणसी)। हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में मंगलवार को रामनगर में चेहल्लुम पूरे धार्मिक श्रद्धा एवं अकीदत के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अज़ा-खानए अबुतालिब, मछहरट्टा से अलम, ताबूत, दुल्दुल एवं ज़ुलजनाह का पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने नौहा पढ़ते हुए मातम किया और कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
चेहल्लुम के अवसर पर सोमवार देर रात गोलाघाट, मछहरट्टा सहित मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मजलिसों का आयोजन हुआ, जहां नौहा-ख्वानी और मातम के माध्यम से कर्बला की घटना को याद किया गया। मंगलवार को अंजुमन मुहाफ़िज़े अज़ा के तत्वावधान में निकला मातमी जुलूस विभिन्न मार्गों से होकर हसन बाग़ इमामबाड़ा पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। इसके उपरांत 18 बनी हाशिम के ताबूत की ज़ियारत कराई गई।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना रज़ा अब्बास बिहारी तथा मौलाना फरमान रज़ा नजफ़ी ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में मानवता, सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने परिवार एवं साथियों सहित सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि मात्र 72 वफादार साथियों के साथ लाखों की सेना का सामना कर इमाम हुसैन ने सत्य और इंसाफ की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।
मातमी जुलूस में सय्यद इब्राहीम रज़ा, सय्यद फरमान रज़ा, इनाम रज़ा, सय्यद अख्तर रज़ा आब्दी, सय्यद आफताब हुसैन, सय्यद वेरासत हुसैन, सय्यद बालिस्टर हुसैन, सय्यद तहज़ीबुल हसन अज़मी, नदीम आब्दी, मुजतबा हुसैनी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद एवं स्थानीय नागरिक शामिल रहे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और गमगीन माहौल देखने को मिला।




