83 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, मणिकार्णिका घाट पर वैदिक रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
वाराणसी। थानारामपुर गांव के वरिष्ठ समाजसेवी, प्रख्यात वेदांत पंडित एवं धार्मिक चिंतक धर्मराज चौबे का सोमवार को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने इसे समाज की अपूरणीय क्षति बताया।
धर्मराज चौबे अपने सरल व्यक्तित्व, विद्वता और समाजसेवा के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखते थे। उन्होंने जीवनभर शिक्षा, सामाजिक उत्थान और धार्मिक जागरूकता के लिए कार्य किया। वेदांत शास्त्र के प्रकांड विद्वान होने के कारण दूर-दराज से लोग आध्यात्मिक एवं धार्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने उनके पास पहुंचते थे।
उनके निधन की सूचना मिलते ही थानारामपुर गांव में शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं शुभचिंतकों ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
परिजनों के अनुसार उनकी अंतिम यात्रा पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ मणिकार्णिका घाट के लिए निकाली गई। वहां वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके ज्येष्ठ पुत्र श्रीकांत चौबे ने मुखाग्नि दी।
अंतिम संस्कार में छोटे पुत्र पंकज चौबे, पौत्र प्रीतेश त्रिपाठी, मधुर चौबे, विकास शुक्ला, नवल चौबे सहित बड़ी संख्या में परिजन, ग्रामवासी, शिष्य, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि धर्मराज चौबे का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, आध्यात्मिक चिंतन और मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनके आदर्श, सेवा भावना और ज्ञान की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।




