गोस्वामी तुलसीदास जी का प्राकट्य दिवस ‘सनातन चेतना दिवस’ के रूप में मनाया गया

धरोहर संरक्षण सेवा संगठन एवं ‘केसरिया भारत’ के गोस्वामी तुलसीदास विचार परिषद ने आयोजित किया कार्यक्रम, वक्ताओं ने तुलसी साहित्य को बताया भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर

 

 

रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय

वाराणसी। गोस्वामी तुलसीदास जी के 529वें प्राकट्य उत्सव के अवसर पर धरोहर संरक्षण सेवा संगठन एवं ‘केसरिया भारत’ के आयाम गोस्वामी तुलसीदास विचार परिषद की ओर से दुर्गाकुंड स्थित श्री धर्मसंघ शिक्षा मंडल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को ‘सनातन चेतना दिवस’ के रूप में मनाया गया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री धर्मसंघ शिक्षा मंडल के महामंत्री जगजीतन पांडेय रहे, जबकि अध्यक्षता काशी के प्रमुख धर्मसेवी मार्कण्डेय तिवारी ने की।

 

तुलसीदास जी ने जन-जन तक पहुंचाया धर्म और लोकमंगल का संदेश

 

मुख्य अतिथि जगजीतन पांडेय ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी सनातन चेतना और भारतीय संस्कृति के महान संवाहक थे। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से धर्म, मर्यादा और लोकमंगल का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को तुलसीदास जी के विचारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

तुलसी साहित्य सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर

 

मुख्य वक्ता एवं केसरिया भारत के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि तुलसीदास जी का साहित्य सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए जनजागरण अभियान को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना पूरा जीवन सनातन समाज को जोड़ने में सेतु की भूमिका निभाने के लिए समर्पित किया।

 

नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे तुलसीदास जी के विचार

 

गोस्वामी तुलसीदास विचार परिषद के प्रदेश अध्यक्ष विशाल दुबे ने कहा कि तुलसीदास जी ने लोकभाषा के माध्यम से सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया। उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना परिषद का प्रमुख उद्देश्य है।

 

संगठन के संरक्षक राकेश टण्डन ने कहा कि तुलसी साहित्य भारतीय समाज की अमूल्य सांस्कृतिक निधि है। वर्तमान समय में युवाओं को तुलसीदास जी के विचारों और सनातन संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है।

 

वहीं केसरिया भारत के प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह ने कहा कि ‘सनातन चेतना दिवस’ का उद्देश्य तुलसीदास जी के प्राकट्य उत्सव को सांस्कृतिक जागरण से जोड़ना है। ‘केसरिया भारत’ धरोहर संरक्षण और सनातन चेतना के विस्तार के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

 

हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

 

कार्यक्रम का आयोजन राज मंगल पाण्डेय ने किया तथा संचालन हर्ष पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का समापन श्री हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ।

 

इस अवसर पर डा. चन्द्रदेव पटेल, सुनील मिश्र, आनन्द मिश्र बब्बू, अनिल मिश्र, जितेंद्र सिंह, पीयूष मिश्रा, राजू गुरु, राकेश त्रिपाठी, शिवम् उपाध्याय, सोनू गोंड, शिवम् दुबे, राजन मिश्र और जितेन्द्र पाण्डेय सहित अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

 

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