बचाव पक्ष ने लगाए जमीन विवाद से जुड़े षड्यंत्र के आरोप, अदालत ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर दी राहत
रिपोर्ट: आनंद रत्न उपाध्याय
मिर्जामुराद (वाराणसी)। जमीन से जुड़े विवाद के बीच दर्ज एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे में आरोपी बनाए गए पत्रकार पवन कुमार मिश्रा को जिला एवं सत्र न्यायालय वाराणसी की विशेष एससी/एसटी एक्ट अदालत से जमानत मिल गई है। मामले में बचाव पक्ष ने मुकदमे को जमीन विवाद से जोड़ते हुए इसे कथित षड्यंत्र बताया है। अदालत के आदेश के अनुसार पत्रकार को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई।
मामले के अनुसार वादी आकाश कुमार गौड़ की ओर से आरोप लगाया गया था कि पवन कुमार मिश्रा ने फेसबुक पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में इन आरोपों को चुनौती दी गई।
बचाव पक्ष के अनुसार, कथित घटना 5 जनवरी 2025 की शाम आठ बजे फेसबुक लाइव से संबंधित बताई गई थी, लेकिन अदालत के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर उस समय फेसबुक लाइव होने के दावे पर सवाल उठाए गए।
पवन कुमार मिश्रा के पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि मामला वास्तव में पुश्तैनी जमीन से जुड़े विवाद से संबंधित है। उनका दावा है कि जमीन पर दूसरे पक्ष का कब्जा है और इसका विरोध करने के कारण परिवार को मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों और जमीन पर कब्जे संबंधी दावों का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा किए जाने वाले विचारण का विषय है।
बचाव पक्ष के मुताबिक, अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध सामग्री पर विचार किया। पक्ष की ओर से बताया गया कि आदेश में जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलने तथा घटना के समय आरोपी की मौजूदगी को लेकर भी सवालों का उल्लेख किया गया। इन्हीं परिस्थितियों में अदालत ने आरोपी को जमानत प्रदान की।
आरोपी पक्ष ने दूसरे पक्ष से जुड़े कुछ लोगों के आपराधिक इतिहास और राजनीतिक संरक्षण के भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जा सकता है।
मामले में आरोपी को जमानत मिलने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस और प्रशासन आगे की जांच में किन तथ्यों को सामने लाते हैं। आरोपी पक्ष ने कथित रूप से फर्जी मुकदमा दर्ज कराने और कानून के दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल अदालत द्वारा दी गई जमानत मुकदमे में अंतिम दोषमुक्ति का निर्णय नहीं है। मामले में आरोपों और साक्ष्यों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।




