भावपूर्ण शास्त्रीय गायन से वृंदावन में बांधा समां, रसिक श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहा
रिपोर्ट : विवेक राय
वाराणसी/वृंदावन। संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास महाराज के आविर्भाव महोत्सव के अवसर पर वृंदावन स्थित ठाकुर राधा स्नेह बिहारी मंदिर में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन में काशी की युवा शास्त्रीय गायिका विदुषी वर्मा को ‘स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान’ से अलंकृत किया गया। उत्कृष्ट संगीत साधना और प्रभावशाली गायन के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी हेमकांत चरण देवाचार्य एवं संस्था के अध्यक्ष आचार्य करण कृष्ण गोस्वामी ने विदुषी वर्मा को सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद विदुषी वर्मा ने इसे अपनी संगीत साधना के लिए महत्वपूर्ण प्रेरणा बताते हुए स्वामी हरिदास की समृद्ध संगीत परंपरा को नमन किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन विदुषी वर्मा ने अपने शास्त्रीय गायन की शुरुआत राग बागेश्री में विलंबित एकताल की बंदिश ‘करके श्रृंगार राधा चली’ से की। इसके बाद उन्होंने छोटा ख्याल ‘कलमई मातेश्वरी’, तराना और संत मीराबाई का भावपूर्ण भजन ‘म्हारे घर आओ जी’ प्रस्तुत किया।
उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीयता, माधुर्य और भावाभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। सुरों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। संगीत प्रेमियों और रसिक श्रोताओं ने उनकी गायकी की जमकर सराहना की।
विदुषी वर्मा की गायकी में रागदारी की परिपक्वता के साथ भावाभिव्यक्ति की स्पष्ट झलक दिखाई दी। उनकी सुरमयी प्रस्तुति को उपस्थित गुणी श्रोताओं और संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा।
गायन में तबले पर ओम प्रकाश पांडेय और हारमोनियम पर आनंद चौबे ने सधी हुई संगति प्रदान की। दोनों कलाकारों की संगति ने प्रस्तुति के प्रभाव और गरिमा को और बढ़ा दिया।
सम्मेलन में डॉ. आदित्यानंद गिरी, डॉ. रामविलास चतुर्वेदी, पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं विधायक श्रीकांत शर्मा, महंत रामदास महाराज, बालकृष्ण महाराज, नकुल दुबे और मुरलीधर चतुर्वेदी सहित अनेक संत, विद्वान, संगीतज्ञ एवं गणमान्यजन मौजूद रहे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय की छात्रा विदुषी वर्मा को मिला यह सम्मान उनकी संगीत साधना के साथ-साथ काशी की समृद्ध शास्त्रीय संगीत परंपरा के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कार्यक्रम का कुशल संचालन देवेन्द्र शर्मा ने किया।




