कोपागंज में अचानक बिगड़ी तबीयत, आठ वर्षीय बेटे के सिर से उठा पिता का साया
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। रोजी-रोटी के लिए यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाला 35 वर्षीय अरुण कुमार उपाध्याय खुद जिंदगी की मंजिल तक नहीं पहुंच सके। चौबेपुर थाना क्षेत्र के अजांव गांव निवासी अरुण कुमार उपाध्याय, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के काशी डिपो में संविदा चालक के रूप में कार्यरत थे। परिवार की जिम्मेदारियों को कंधों पर उठाए अरुण 4 अक्टूबर को वाराणसी-गाजीपुर-गोरखपुर सेवा की डिपो बस लेकर यात्रियों के साथ निकले थे। किसी को क्या पता था कि यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा।
कोपागंज पहुंचते ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होते देख बस के परिचालक ने तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद ली और अरुण को उपचार के लिए बीएचयू ले जाया गया। जहां चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के दौरान अरुण की मौत की खबर जैसे ही परिजनों और गांव वालों तक पहुंची, अजांव गांव में चीख-पुकार मच गई और चारों ओर मातम छा गया।
अरुण अपने पीछे पत्नी अपर्णा उपाध्याय और महज आठ वर्ष के बेटे को छोड़ गए हैं। पिता की अचानक मौत ने मासूम बेटे के सिर से पिता का साया छीन लिया, वहीं पत्नी के सामने परिवार की जिम्मेदारियों का पहाड़ खड़ा हो गया। अरुण की मौत की खबर से परिचितों और ग्रामीणों में भी गहरा शोक है।
चंद्रावती घाट पर नम आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई के दौरान मौजूद हर आंख नम थी। जिस अरुण को ग्रामीण कुछ दिन पहले तक परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियां निभाते एवं मुस्कुराते हुए देख रहे थे, उस अरूण को अचानक खो देने का दुख पूरे गांव के लिए असहनीय बना हुआ है। घटना के बाद से अजांव गांव में शोक और सन्नाटे का माहौल है।




